450 वर्ष पूर्व गेलीलियॉ से माना जाता है । उसके पूर्व कोपरनिक्स ने यह वैज्ञानिक मान्यता स्थापित की थी कि सूर्य स्थिर है और पृथ्वी उसके आसपास चवकर लगाती है । यस्तु' उस समय साधारण समाज की धारणा, मानसिकता केसी थी, इसका विपूँषण काते हैँ तो ध्यान में आता है कि उस समय जीवन के किसी भी प्रश्न के उत्तर के संदर्भ' में अरस्तू प्रमाण था । कोई भी प्रश्न, कोई भी समस्या खडी. हुईं तो इस सदर्भ३ में अरस्तूने क्या कहा, यह खोजने की एक प्तामान्य प्रवृत्ति थी । इस बारे में एक मनोरजक' कथानक प्रचलित है । एक बार लदन' में किसी हलि में बैठकर कुछ विद्वान परस्पर विचार विमर्श का रहे थे । विचार विमर्श का विक्य था, घोड़े के मुह० में विन्तने दात७ होते हैं? अलग-अलग विद्वान् सख्या" बता रहे थे । परिणाम स्वरूप निर्णय नहीं हो पा रहा था-एक युवक पास में बैठा इनका वार्तालाप उत्सुक्ता से सुन रहा था । इतने में एक विद्वान्बोला-अत्मि निर्णय के लिए देखा जाये कि घोड़े के दात७ के विषय में अरस्तू ने क्या कहा है? अत्त: एक विद्वान्मास के पुस्तकालय में अरस्तूकी पुस्तक खोजने गया l इस बीच यह चर्चा सूनवे क्ला युवक उठा और उस हाल से चाहर क्ला गया । वह बाहर क्ला गया है इस ओर किसी का ध्यान आकर्षित नहीं हुआ । परन्तु कुछ समय बाद लौटका जब वह वापस हाल" में आया तो हठात्सब उसकी और देखने लगे, क्योकि' वापस आते समय उसके साय एक जीवित घोड्रा था । उस घोडे. को सामने खड्रा कर उसने विद्वानों से कहा कि अरस्तूकौ क्यों परेशान करते हो? यह घोड्रा खड्रा है, इसके दात" गिनकर निर्णय का लीजिए h गैलीलियों के पहले सारे यूरोप में मान्यता थी कि भारी वजन चाली वस्तु हल्की वजन वाली वस्तु सै अधिक वेग से गिरेगी, क्योंकि अरस्तूने कहा था कि
एक पौड तथा दस पौड 'का पत्थर यदि ऊपर से पेंत्का जाथे तो दस पॉड का पत्थर दस गुना वेग से नीचे गिरेगा ।
गैलीलियों ने इस मान्यता को चुनौती दो और क्या वस्तु चाहे एक पौड की हो या दस पौड की वायु का प्रतिरोध यदि छोड, दिया गां तो दोनों एक साथ जमीन पर गिरेगी । जैसे ही गैलीलियो ने इस मान्यता का प्रतिपादन किया, सारा शहर उस पर टूट पड्रा-तुम अरस्तू से अधिक समझद्या समझते हो अपने को? इस पर गैलीलियो ने कहा,जौ मैंने कहा वह करके बता सक्ला हूँ। इसे सुन सब लोगों में आश्चर्य और उत्सुक्ता जपी और जिस दिन गैलीलियो अपनी बात को प्रयोग द्वारा सिद्ध काने क्ला था, उस दिन पोसा की प्रसिध्द मीनार के पास सारा नगर उमड पडा, । गेलीलियो मीनार पर चढा, सारे लोग ससि रोके ऊपर देखने लगे । इसी समय गेलीलियो ने एक और क्स पौड के दोनों पत्थर एक साथ छोडे और आश्चर्य चकित लीगों ने देखा, दोनों पत्थर एकसाथ जमीन पर गिरे । प्रत्यक्ष अपनी आखों'" से यह प्रयोग देखने के बाद लोगों की प्रतिक्रिया थी, गेलीलियो जरूर काला जादूजानता है, अन्यथा अरस्तूकमौ गलत हो सकते हैं? यह घटना बताती है कि आज से 45० वर्ष पूर्व यूरोप में मानसिकता केसी थी?
अग्रेज' स्वयं क्रो बड्रा बुद्धिमान्मानते हैँ । पातु" वे जब हिन्दुस्थान आये तो उन्होने' कभी रूई नहीं देखौ थी । अत: कपास का पेड़, उससे निक्ली रुई, उसका धागा और कपड्रा उनके लिए नई चीज थी । उन्हे' तो ज्ञात था कि का७ भेड पर होती है और उससे वस्त्र बुनते हैं । अत्त ८ वे कहत्ते थे कि यह हिन्दुस्तानी बड्रा चालाक है । यह ऊन७ जो भेड पर होना चाहिये, वह यह पेड़ पर उगाता है और उससे कपडा. बनाता है । 2 ये तथ्य यूरोपीय मानसिक्ला व प्रयग्गशीलता के प्रति उनकी दृष्टि को बताते हैं 1
यह ठीक है कि पिछले 1 so वर्षों में विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में युरोप में अप्रतिम प्रगति हुई, पर उससे पूर्व का समाज केसा था? उसमें अ'धश्रद्धाएँ हावी थी या तर्क? बाइबिल या चर्च की मान्यताओँ के विपरीत किसी ने तुच्छ कहा, प्रयोग किया तो उनके साथ कैसा व्यवहार किया गया, इस पर थोडा. दृष्टिपात काँगे तो यूरोप की मानसिकता का फ्ता लगेगा ।
( 1 ) गैलीलियो के जन्म से पूर्व लगभग 1 soo वर्ष यूरोप पर अरस्तूके विचारों व धारणाओं का राज्य रहा । क्लोख्यिल टॉत्तेमी ने ई.स्रन् 139 में अरस्तूके अजुसा पृथ्वी केन्दिक विश्व की मान्यता स्थापित की जिसमें पृथ्वी केन्द्र में और सूर्य उसके आसपास चक्कर लगाता है । इन मान्यताओं क्रो चचं का सर'क्षण मिला और ये मान्यताएँ शताब्दियों तक समूचे पश्चिमी जात् में हावी रहीं । पोलैड में जमे कॉपरनिकस ने सन् 1543 में टॉत्तेमी की धारणा के विपरीत यह प्रतिपादित किया कि सूर्य वेन्द्र में है और पृथ्वी उसके आसपास चवक्रर लगाती हैं । उसकी यह स्थापना पश्चिमी विज्ञान के इतिहास का प्रारंभ विन्दु बन गई । चर्च विरुद्ध इस बात का जिस पुस्तक में प्रतिपादन किया गया, उसके छपने के पूर्व क्रोपरनिकस का देहात' हो गया । परन्तु बाद में जब यह पुस्तक प्रकाशित हुई? तो ठस पर प्रतिबंध लगा दिया गया ।
( 2) गैलीलियो ने दूरबीन का आविष्कार किया और उसके द्वारा आकाश का निरीक्षण किया और उसने माया कि सूर्य केन्द्र में होने का कॉपरनिकस का सिद्धात' सहो है l इस पर टालेमी" को मानने वाले लोगों ने दूरबीन के प्रयोग को धर्म बिल्ड कार्य माना । धर्मगुरुओं ने कोपरनिक्स को सही मानना भी पवित्र शास्वी' के विरुद्ध है, ऐसा क्लका गैलीलियो से माफी मगत्नाका' आगे से ऐसा धर्मबिस्ख कार्यं न काने का वचन लिया और उसे घर मे' नजर वैब्द क्सि 1 इस नजर केद की अवस्था में उसने भौतिक शास्त्र ग्रंथ लिखा जिसके छपने के र्ड्स ही वह अंधा हो गया और नज़र वैन्द की अवस्था में ही सन् 1642 में 78 वर्ष को अवस्था में दुनिया को छोड कर क्ला गया ।
( 3) कॉपरनिकस के सूर्य केन्दित सिद्धांत" का समर्थन 1546 में डैनमार्क में जन्मे' खगोलवेत्ता टाइको बूयो ने किया । गणित और धातुशास्त्र में निष्णात ब्रूनो ने 75० तारों को पहचाना । बिना दूरबीन के अवलोकन से उसने ये उपलब्धियों प्रात कॉ । ब्रह्माण्ड में पृथ्वी जैसे अनेक जगतूहैँ, ऐसी उसको स्थापनाओं से क्रोधित हो पोप और पग्दरिचों ने उसे आठ वर्ष तक की में रक्षा और उपने सिद्धातो" से समझौता न करने व माफी न मांगने७ के कारण सन् 1600 में उसे जिदा' क्ला दिया ।
(4) ब्रूनो के साथ सहयोगी रहे स्वतत्र' प्रतिभा के धनी जर्मनी मे' 1571 में
जन्मे' जोन केप्लर ने खगोल शास्त्र का गहरा अध्ययन का ग्रहों की स्थिति व गति के नियम खोजे व उनकी कक्षाओं के नक्शे तैयार किये । उसकी इस समझ को धर्म शास्त्र विरुद्ध मानकर कैथेलिकों ने उस पर हमला विज्या और वह भागता रहा तथा गरीबी व बीमारी की अवस्था मेँ लीस नगर से जाते समय धर्मशाला में 163० मेँ उसकी दुखद मृत्यु हो गई I
अपने मत अथवा स्थापित मान्यता के विरुद्ध फ्लो वाले को जिदा' जलाने, केद में रखने या घुट-घुट का मरने को मजबूर करने वाले ये उदाहरण बताते हैं कि 400 वर्ष पूर्व तक तर्क एवं प्रयोगशीलता के प्रति पश्चिम में क्या दृष्टि थी । भारत में तर्क व प्रयोगों के प्रति दृष्टि
भारत मेंहजारो' वर्ष पूर्व से विद्या के क्षेत्र में पूर्ण स्वातव्य" रहा है ।
